इम्तिहान देने निकले थे… रास्ते में मौत मिल गई! भतीजे-भतीजी को मार डाला

सत्येन्द्र सिंह ठाकुर
सत्येन्द्र सिंह ठाकुर

मध्य प्रदेश के Sehore जिले के छोटे से गांव Dharampura में जमीन का विवाद खून की कहानी बन गया। शुक्रवार सुबह जो दो युवा परीक्षा देने के लिए घर से निकले थे, उन्हें शायद अंदाज़ा भी नहीं था कि रास्ते में उनका सामना अपने ही रिश्तेदारों से होगा—और वही रास्ता उनकी आखिरी मंज़िल बन जाएगा।

20 वर्षीय शीतल मालवीय और 19 वर्षीय कुलदीप मालवीय सुबह करीब साढ़े सात बजे घर से निकले थे। किताबें हाथ में थीं, सपने आंखों में थे। लेकिन गांव के बाहर ही घात लगाए बैठे उनके चाचा और चचेरे भाई ने उन्हें घेर लिया।

कहासुनी से खूनी हमला

पुलिस के मुताबिक दोनों परिवारों के बीच पैतृक जमीन को लेकर काफी समय से विवाद चल रहा था। उसी पुराने झगड़े की चिंगारी शुक्रवार को अचानक आग बन गई। गवाहों के अनुसार पहले बहस हुई, फिर गाली-गलौज और देखते ही देखते डंडों से हमला शुरू हो गया।

आरोप है कि चाचा और उसके बेटे ने मिलकर दोनों भाई-बहन पर ताबड़तोड़ वार किए। हमला इतना बेरहम था कि कुछ ही मिनटों में दोनों सड़क पर लहूलुहान होकर गिर पड़े।

गांव वालों के पहुंचने तक खत्म हो चुकी थी सांसें

चीख-पुकार सुनकर ग्रामीण दौड़े तो आरोपी मौके से भाग चुके थे। स्थानीय लोगों ने तुरंत दोनों घायलों को अस्पताल पहुंचाया, लेकिन डॉक्टरों ने उन्हें मृत घोषित कर दिया।

यानी जिस रास्ते से वे परीक्षा देने जा रहे थे, वही रास्ता उनकी जिंदगी का आखिरी सफर बन गया।

पुलिस की त्वरित कार्रवाई

घटना की पुष्टि करते हुए एसपी Deepak Shukla ने बताया कि मुख्य आरोपी हरिसिंह मालवीय और उसके बेटे को हिरासत में ले लिया गया है। पुलिस के अनुसार मृतकों के पिता जगदीश मालवीय और आरोपी के बीच लंबे समय से जमीन को लेकर विवाद चल रहा था। उसी दुश्मनी ने आखिरकार दो युवा जिंदगियां निगल लीं।

गांव में मातम और तनाव

दोहरी हत्या की खबर फैलते ही पूरे गांव में सन्नाटा और गुस्सा दोनों फैल गए। परिवार सदमे में है और गांव में तनाव को देखते हुए अतिरिक्त पुलिस बल तैनात कर दिया गया है।

पोस्टमार्टम के बाद शव परिजनों को सौंपे जाएंगे और पुलिस पूरे मामले की हर एंगल से जांच कर रही है।

सवाल जो फिर खड़े हो गए

ग्रामीण भारत में जमीन का विवाद कोई नई बात नहीं है। लेकिन हर बार एक ही सवाल सामने खड़ा हो जाता है क्या कुछ बीघा जमीन इंसानियत से ज्यादा कीमती हो गई है? क्योंकि यहां दो बच्चों की मौत ने सिर्फ एक परिवार नहीं, पूरे गांव को झकझोर दिया है।

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